इंसान कैसे रंग में... लिपा-पुता सा है
रोड़ा-पत्थर सा यहां बिखरा पड़ा सा है,हाथ कुछ और पैर... कुचला दबा सा है,ख़ून का छींटा कहीं और अश्क की दरिया,परिजन किसी का लाश से लिपटा हुआ सा है,है कौन हिन्दू, और मुस्लिम, ढूंढ के बतला,अल्लाह तेरा और राम भी... दुबका-छुपा सा है,जिहाद या फ़साद है, है राम या...
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AnbhigyA
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[28 May 2010 01:16 AM]



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