और उस 'ईमान' रखने वाले ने मुझे चाय तक पिलाने से मना कर दिया... है कोई समाधान आपकी नजर में ?

सुनिये मेरी भी.... ...मेरे 'ईमान' रखने वाले मित्रों,अपना भी हाल कुछ अजीब है...जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती जाती है...चाय की तलब भी उतनी ही बढ़ जाती है।जा रहा था मुख्यालय को...अचानक चाय पीने की इच्छा हुई...छोटा सा छप्पर डले एक ढाबा सा दिखा... गाड़ी रूकवाई और ड्राईवर को बोला चाय... [पूरी पोस्ट]
writer प्रवीण शाह
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[28 May 2010 00:32 AM]

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