आत्मा और अमरता - कविता
एक कौंध है आत्माबशर्ते कि तुम्हारे पास निगाह हो हलचल है अंतरमन की कि छलकता चला आता है जलकिनारे के पारभिंगोता त्वचाऔर अमरताएक स्वप्न है अगर हमारे पास कदम होंउधर बढाने कोनहीं तो मिटटी का सूखा ढेर है आत्माजिसे हवा जब चाहे उडा सकती...
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[28 May 2010 00:15 AM]



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