हे आधुनिक कवि!!

मेरे विचार, मेरी कवितायें हे आधुनिक कवि!  जिस पल तुम परेशान होकर ’क्या कविता लिखूँ’ कि उधेड़बुन में अपनी शर्ट की सिवन के साथ खेलते रहते हो… उस एक पल ही, न जाने कितनी कविताओं के पोशाकों की सिवन उधेड़ी जा रही होती है… उस एक पल ही, किसी दुनिया में कविताओं पर थोपी जा रही होती है... [पूरी पोस्ट]
writer Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय)

समाज

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[27 May 2010 22:42 PM]

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