यह सोच के मैने गिफ्ट दिया था कि मना करेगी ~~

यूरेका उसने उस दिन मेरे गाल पर झन्नाटा लिखा था कोई ताड़ न पाये इसलिये मैनें सन्नाटा लिखा था . उसकी गली में आया था कुत्ते पीछे पड़ गये थे पढ़कर देखते मेरे चेहरे पर ज्वार-भाटा लिखा था . चमन में आया था मैं चश्मे-नम करने की ख़ातिर मेरे भाग्य में तो निगोड़ा यह सूखा कांटा... [पूरी पोस्ट]
writer M VERMA
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[27 May 2010 20:16 PM]

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