मुकम्मिल इनसानियत की धार थी

जनज्वार  यादें हैनसन टी के स्मृतियों  का कोठार है मेरा हृदयमैंने कुछ वैसे ही सहेज रखी हैप्रियजनों  की यादेंजैसे कोई अमीर व्यापारी  तिजोरी मेंबंद किये रखता है सोना-चांदीपसलियों के पिंजरे में कैद मेरी... [पूरी पोस्ट]
writer ajay prakash

poetry

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[04 May 2010 06:28 AM]

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