लघुकथा...तन से सुन्दर ..मन से सुन्दर..(गीत : आगे भी जाने न तू, पीछे भी जाने न तू, जो भी है, बस यही एक पल है...)

काव्य मंजूषा लीला और शीला दो बहनें ..लेकिन दोनों  में ज़मीन आसमान का फर्क था...लीला रूपवती, चंचल और मुखर जबकि शीला बहुत सीधी-सादी और चुप रहने वाली....दोनों धीरे धीरे बड़ी हो गईं..माँ-बाप को उनकी शादी की बहुत फ़िक्र हुई... रिश्तों की तलाश की गयी..परन्तु जो भी आता... [पूरी पोस्ट]
writer 'अदा'
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[27 May 2010 18:26 PM]

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