लिखते-लिखते हमें कुत्‍ते की पूँछ क्‍यों याद आ जाया करती है

अनौपचारिक यह जो आप पढ रहे हैं यह लाइन सबसे अंत में लिखी गई है पहले हमें लगा इसे कोई श्रृंखला जैसा कोई नाम दे दें । फिर उसी चीज के एक दो तीन पढते पढते होने वाली ऊब के याद आने की वजह से एक शीर्षक दे दिया ।शीर्षक पर न जाऍं क्‍योंकि आपको पता ही है कि शीर्षक और पोस्‍ट... [पूरी पोस्ट]
writer अर्कजेश
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[27 May 2010 16:27 PM]

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