एक रिपोस्ट :- 450 वी पोस्ट
हिंद का जिन्दा क्या हिंद का जिन्दा कॉप रहा है ????गूंज रही है तदबिरे,उकताए है शायद कुछ कैदी.......और तोड़ रहे है जंजीरे !!!!!दीवारों के नीचे आ आ कर यू जमा हुए है ज़िन्दानी .....सीनों में तलातुम बिज़ली का,आखो में जलाकती शमशीरे !!!!क्या उनको ख़बर थी होठो पे...
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शिवम् मिश्रा
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[27 May 2010 14:15 PM]



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