तन ना भयो दस बीस ऊधो!

क्वचिदन्यतोअपि..........! कलजुगी उधो से गोपियाँ कह रही हैं -हे उधौ तुम देह देह की रट लगाये हुए हो एक बार भी मन की बात करते तो हम उसे जिसे भी कहते उसे दे देते ..तुम्हे भी ..अगर तुम पूरी तरह से देह -राग से मुक्त  हुए होते तो तुम्हे भी पकड़ा देते ....यहाँ कितने  मन  तो... [पूरी पोस्ट]
writer Arvind Mishra
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[27 May 2010 13:56 PM]

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