गर्द जमी पलकों को रक्त से, मार पंछाटे धो लो !! शव जलाकर हिंद शान का , कैसे कह दूँ सो लो !!!.............{{{कविता }}}
मौन ओढ़ कर सोये भारती, अब तो आँखें खोलो,पाव बची हिन्दता गल्ले में, बांट लगाकर तोलो। गर्द जमी पलकों को रक्त से, मार पंछाटे धो लो,शव जलाकर हिंद शान का , कैसे कह दूँ सो लो।बजरंग पूछ सा बढ़ा जा रहा, झूंठी आजादी का कष्ट,एड़ी से चोटी तक सारी, जन-सरकार व्यवस्था...
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राजेन्द्र मीणा
जयहिंद
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[27 May 2010 13:20 PM]



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