पाँच चौराहा....

खामोशी..बहुत कुछ कहती है चौराहा हमेशा से मुझे सम्मोहित करता रहा है... शाम ढलते ही मैं घर के पास वाले चौराहे पर पहुँच जाता हूँ... ढेर सारे नजारे जो मिलते है... चौराहे को महसूस करते हुए अब तक मैंने ५ कवितायें लिखी है... 1चौराहे पर खड़ी गाँधी की मूर्तिनिर्विकारएकटक देखतीअपनी बनाई,... [पूरी पोस्ट]
writer अभिषेक प्रसाद 'अवि'
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[23 Mar 2010 05:59 AM]

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