रोई आँखे मगर....3

खामोशी..बहुत कुछ कहती है मुझे गर्मियोंकी छुट्टी की वो लम्बी-लम्बी दोपहारियाँ याद है, जब हम बच्चे ठंडक ढूँढ नेके लिए पलंगके नीचे गीला कपड़ा फेरकर लेटते थे। कभी कोई कहानीकी किताब लेकर तो कभी ऐसेही शून्यमे तकते हुए। चार साढे चार बजनेका इंतज़ार करते हुए जब हमे बाहर निकलनेकी इजाज़त... [पूरी पोस्ट]
writer shama

संस्मरण

views
3
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[04 Apr 2010 10:10 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix