क्योंकि नायक और खलनायक दोनों बदल चुके हैं-
फिल्म का नाम याद नहीं आ रहा है. उसमें दादामुनि अशोक कुमार कह रहे थे कि आखिर ये साले खलनायक समझते क्यों नहीं कि वो कितना ही शातिर, चालाक और ताकतवर क्यों ना हो, आखिकार एक कमजोर, निहत्था और साधारण बुद्धि का नायक उसे धर दबोचेगा, उसकी जमकर पिटाई करेगा और...
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Satyajeetprakash
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[27 May 2010 12:53 PM]



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