बुद्ध पूर्णिमा

आर्यश्री Aaryashri जब अंधकार की काली छाया मन के भूतल को तोड़ती है समाज की बेढंग तरंगे जब जल के रुख को मोड़ती हैंहर रोज हमें होने का कुछ मतलब ना समझ में आता है एक अप्रितिम उज्जवल किरण सा कोई हमें राह दिखाने आता हैछोड़ मायावी दुनिया को जब देह का तात्पर्य समझ में आता है वह... [पूरी पोस्ट]
writer aarya
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[27 May 2010 12:08 PM]

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