वाजिद अली शाह अख्तर के दुर्लभ शेर
आज जाने-आलम वाजिद अली शाह "अख्तर" के दो शेर आपकी खिदमत में पेश कर कर रहा हूँ। ये लखनऊ वालों के लिए अपने आखिरी नवाब की यादगार है जबकि उन लोगों को एक जवाब है जो जाने-आलम को एक विलासी नवाब भर समझते हैं। ज़रा इसके काफिए पर गौर करियेगा । उस दौर में उस्तादों...
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हिमांशु बाजपेयी
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[27 May 2010 12:18 PM]



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