बुलबुला

Shikha Deepak बरसात हो रही है.........जमीन पर पड़ती बूँदें.........बनते बिगड़ते बुलबुले.........इन्ही बुलबुलों सी ही तो है जिन्दगी.......एक पल बनती अगले ही पल बिगड़ती पर इन दो पलों के बीच एक पूरी जिंदगी। कश्मकश.......होड़......आपाधापी......संघर्ष.......औपचारिकता, यही... [पूरी पोस्ट]
writer Shikha Deepak

ज़िन्दगी

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[20 Jan 2010 05:56 AM]

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