इम्तिहान ज्यों ख़तम हुआ,कल्लू नें बाँधी आस----(विनोद कुमार पांडेय)

मुस्कुराते पल-कुछ सच कुछ सपने इम्तिहान ज्यों ख़तम हुआ,कल्लू नें बाँधी आस,हे भगवान चढ़ाइब लड्डू,बस करवा द पास,बारहवीं के इम्तिहान का,टेंसन बहुत लिया,गुलछर्रों के साथ साथ में,मेहनत खूब किया,नकल कराने को चाचा ने पूरा ज़ोर लगाया,पर किस्मत का मारा बुद्धू,वो भी ना कर पाया,टीचर से लेकर चाचा... [पूरी पोस्ट]
writer विनोद कुमार पांडेय
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[27 May 2010 11:35 AM]

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