ईश्वर , प्रेम और जिंदगी के ऊपर एक कविता
कल वृन्दावन जाना हैं तो कृष्ण राधे के प्रेम और हमारे अपने जीवन कि जटिलताओ को जोड़कर एक कविता बना ही डाली । जैसा कि स्वाभाविक हैं मेरे जैसे तुच्छ जीव का प्रेम तो इसमें आएगा ही । चलिए आदत से मजबूर भावुक ना हो जाऊ , इसीलिए आपको श्री चरणों में ये कविता का भाव...
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Virender Rawal
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[27 May 2010 11:03 AM]



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