आँच 18 : 'बौराए हैं बाज फिरंगी'
आँच - आचार्य परशुराम राय आँच के इस अंक में श्री रावेन्द्र कुमार रवि द्वारा विरचित 'बौराए हैं बाज फिरंगी' नामक कविता (गीत) को समीक्षा के लिए चुना गया है। कविता में आज की आतंकवाद और नक्सलवाद की समस्याजनित भावभूमि पर अच्छे और आकर्षक बिम्बों से कविता को...
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करण समस्तीपुरी
आंच
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[27 May 2010 09:28 AM]



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