रहचुली

गुरतुर गोठ मेला म लगे हे रहचुलीतरी ऊपर घूमत सहेजे रहचुलीचेंवचेंव चेंव नरियावत हे रहचुलीबाबू, नोनी सबो ल बलावत हे रहचुलीपईसा म झूले बर बइठाए म रहचुलीआ रे टुरा झूल ले, कहिथे ये रहचुलीमीत-मयारू के मया ठउर ये रहचुलीआमा के ममहावत मऊर ये रहचुलीजिनगी के संसो-पीरा मेटाथे... [पूरी पोस्ट]
writer संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari

आनंद तिवारी पौराणिक

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[27 May 2010 08:24 AM]

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