उफ़ ! ये गरमी

sameeksha खिड़की से झांकती ये चिलचिलाती धूप ये अलसाए से दिन बेरंग-बेरूप सामने है कर्त्तव्य पर्वत-स्वरुप निकलने न दे घर से ये चिलचिलाती धूप ये आंच ये ताप कब होगा समाप्त झुलसती ये गरमी बरस रही है आग धूप के कहर ने तो ले ली कई... [पूरी पोस्ट]
writer ana

kavita

views
10
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
5
[27 May 2010 07:46 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix