ओ......बाबा कृष्ण....!!संभाल लेना यार मुझको....हम सबको.....!!
ओ......बाबा कृष्ण....!!संभाल लेना यार मुझको....हम सबको.....!! इन दिनों कई बार यूँ लगता है कि हम लिखते क्यूँ हैं.....हजारों वर्षों से ना जाने क्या-क्या कुछ और कितना-कितना कुछ लिखा जा चूका है....लिखा जा रहा है...और लिखा जाएगा....मगर उनका कुछ अर्थ....क्या...
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भूतनाथ
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[27 May 2010 07:22 AM]



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