बांग्लादेश बनने की त्रासद कहानी

छोटी गली... हामिद मीर के लेख का दूसरा हिस्सा...मेरे एक वरिष्ठ साथी अभी भी जीवित हैं। उनका नाम अफजल खान है। वह 73 बरस के हैं। उन्होंने असोसिएट प्रेस ऑफ पाकिस्तान के लिया काम किया है। वह 1980 से 1985 के दरम्यान पाकिस्तान फेडरल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के महासचिव थे।... [पूरी पोस्ट]
writer चन्दन कुमार

बातें जहान की

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[27 May 2010 06:49 AM]

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