धनुष सरीखा प्लाट
धनुष सरीखे प्लाट में, चले हृदय पर तीर।सब बांधव बैरी बने, आँसू बहाय वीर।।आँसू बहाय वीर, कोई ना पूछे हाल।होय जिगर का खून, रहे रोज आँखें लाल।।कह ‘वाणी’ कविराज, बनो तुम उसी सरीखे।या झट बेचो आप , प्लाट जो धनुष सरीखे।। शब्दार्थ: हृदय पर तीर = हार्दिक पीड़ा,...
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[27 May 2010 06:41 AM]



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