शांत, शिथिल और अमिट चेहरे
बेगुसराय में किराये के मकान में रहते थे हम. न्यू दिनकर नगर प्रोफेसर्स कॉलोनी में. लाल पगड़ी बांधे आता था वो. चमकती हुई सफ़ेद मूछ और दाढ़ी में लिपटा था उसका चेहरा. एक हाथ में पीतल की कमंडल होती थी. दूसरे में लाठी. साल दर साल बीते. सिवाय चंद झुर्रियों के उसके...
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AnbhigyA
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[27 May 2010 05:17 AM]



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