माने, जाने जिनकी सहूलियत के लिए गिना जाता होगा, देश..
इतनी हड़बड़ी में मां को समझाना मुश्किल था कि गड़बड़ी होनी नहीं चाहिए. हड़बड़ी न होती तब भी मां को समझाना मुश्किल होता. गड़बड़ी हुई मतलब गई चीज़ें हाथ से. जैसाकि देवराज चाचा पूरे आत्मविश्वास से कहा करते थे. ‘इट इज़ लाइक ड्राइविंग ऑन द हाइवे’, चाचा...
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Pramod Singh
किधरकथा
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[27 May 2010 05:02 AM]



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