सार्थक....गतांक से आगे

हिंदी हैं हम.. "हाँ,अकेले ही जा रही हूँ|बंगलोर से आ रही हूँ|मेरे कॉलेज बैच का सिल्वर जुबली फंक्सन है|"उसकी इस हड़बड़ी ने मेरे चेहरे पर बरबस एक मुस्कान ला दी थी|इस लड़की में पुरानी उत्तरा को देख कर अच्छा लगा था,या यूँ कह लूँ एक अपनापन सा लगा|वो भी अपना सामान ठीक करने... [पूरी पोस्ट]
writer आस्था "देव"
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[27 May 2010 04:38 AM]

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