दुनिया को कमीनी बनाने वालों पे लिखी कविता

राजेश गुप्ता आपसे रूबरू बढ़ गए कितने भाव ज़मीनों के हौसले बुलंद हैं सब कमीनों के भोली सूरत के पीछे नीच इरादेधोकेबाज़ हैं, लगते हैं सीधे सादेफरेब करने का आया है ऐसा दौर सम्बन्ध है कहीं, रिश्ता कहीं औरसाँसों की खुशबू में जो भी फंसेगाझूठ के ज़हर में दम घुट के मरेगापरवरिश में ऐसों की... [पूरी पोस्ट]
writer WindEnergyMan

hindi poetry

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[27 May 2010 03:37 AM]

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