मैं ‘मुस्कान’ कैसे हुआ..

ठाले बैठे... बस यूं ही... लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं कि भईए, ये ‘मुस्कान’ क्या है? आज बता ही देता हूं।द्वारिका प्रसाद माहेश्रवरी जी का नाम तो सुना ही होगा आपने। उनकी कविताएं ‘उठो लाल अब आंखे खोलो, भोर भई अब मुख को धो लो...’और 'वीर तुम बढ़े चलो..', शायद ही किसी ने अपने छुटपन में ना... [पूरी पोस्ट]
writer ANURAAG MUSKAAN
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[27 May 2010 03:54 AM]

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