कालकोठरी में ताई अब मुझे न रहना

तीखी नज़र शीला मेरी मौत से करिये नहीं मजाकपड़ा-पड़ा मैं जेल में होता रोज हलाकहोता रोज हलाक कष्ट पड़ता है सहनाकालकोठरी में ताई अब मुझे न रहनादिव्यदृष्टि है नागवार यह शासन ढीलाकरिये नहीं मजाक मौत से मेरी शीला... [पूरी पोस्ट]
writer दिव्यदृष्टि
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[27 May 2010 03:30 AM]

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