मिले मज़बूत को मज़बूतियाँ हर पल सहारे भी

Jogeshwar Garg मिले मज़बूत को मज़बूतियाँ हर पल सहारे भी उन्हें हासिल हमेशा ही निगाहें भी नज़ारे भी किसे दें दोष गर ये ज़िंदगी सैलाब बन जाए कभी मदहोश धाराएं कभी बेखुद किनारे भी न जाने ज़िंदगी क्या क्या दिखायेगी अभी आगे कभी कुहरा कभी पतझड़ कभी... [पूरी पोस्ट]
writer jogeshwar garg

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[27 May 2010 02:49 AM]

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