दीप देहरी पे मन बस जलाता रहा !!
मैं तुम्हारी प्रतीक्षा में दहलीज पर,सांतिये नेह के बस बनाता रहानैना तकते रहे सूनी पगडंडियाँ,दीप देहरी पे मन बस जलाता रहा !!तुम मिले तो लगा मन के हर कोन में,फिर बसंती पवन का बसेरा हुआतुम मिले तो लगा की ग्रहण छट गया,मन में फिर आस का इक सवेरा हुआ !इस सवेरे...
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vipin "mann"
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[27 May 2010 02:13 AM]



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