अंतिम क़िस्त-कौन चला बनवास रे जोगी

आज के ग़ज़लकार और ग़ज़ल. इस तरही मुशायरे में तक़रीबन ३० शायर-शाइराओं ने हिस्सा लिया। मिला-जुला सा अनुभव रहा । देश-विदेश से ३० शायर एक जगह आकर इकट्ठा हों वो भी लगभग मुफ़्त में ,बताओ और क्या चाहिए। कुछ कच्चे-पक्के शे’र, नये-पुराने शायरों ने सबके सामने रखे हैं। अनुभव और प्रयास का... [पूरी पोस्ट]
writer सतपाल ख़याल
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[27 May 2010 01:27 AM]

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