मन के भय
समय कभी ऐसे भी रंग दिखाता है कि खुशियों से भरे क्षण भी पूरा सुकून नहीं ला पाते| मन अन्दर ही अन्दर चौंकता रहता है, एक भय सा बैठ जाता है मन में ऐसा लगने लगता है जाने कब ठंडी बयार के झौंके बहने बंद हो जायेंगे और निराशाएं, कुंठाएं हमेशा की सिर उठा सामने...
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swaarth
poetryfearman ke bhaysaahas
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[27 May 2010 00:58 AM]



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