क्षमा

निशांत का हिंदीज़ेन ब्लॉग एक दिन बुद्ध ने भूमि पर घिसटते हुए एक लंगड़े योगी को देखा. “मैं अपने पापों का फल भोग रहा हूँ” – योगी ने कहा. “तुमने कितने पापों का फल भोग लिया है?” “यह तो मैं नहीं जानता”. “और कितने पापों का फल भोगना शेष... [पूरी पोस्ट]
writer Nishant

क्षमाबौद्ध कथाएँ

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[26 May 2010 21:30 PM]

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