क्षमा
एक दिन बुद्ध ने भूमि पर घिसटते हुए एक लंगड़े योगी को देखा. “मैं अपने पापों का फल भोग रहा हूँ” – योगी ने कहा. “तुमने कितने पापों का फल भोग लिया है?” “यह तो मैं नहीं जानता”. “और कितने पापों का फल भोगना शेष...
[पूरी पोस्ट]
Nishant
क्षमाबौद्ध कथाएँ
26
4
0
4
4
[26 May 2010 21:30 PM]



Shuffle








