धीरे-धीरे एक आदत की ओर...

MERE SAPNE MERE APNE सुबह हर किसी को जल्दी, हर कोई अपने कदमों से तेज, दूसरे से पहले पहुंचने की होड़। एक अजनबी से भी एक अनजाना मुकाबला, आगे निकलने की जद्दोजहद। हर कोई भीड़ का हिस्सा और नहीं भी। एक-दूसरे को धक्का देते, कोहनी से पीछे ढकेलते, आगे बढ़ जल्दी से सीट लपकने की जी जान... [पूरी पोस्ट]
writer Nitish Raj

हाव भाव

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[26 May 2010 20:33 PM]

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