होऊंगा जहां नहीं दीखूंगा

azdak घबराहट के किसी क्षण घेराई मेंहदबद की खोजाई, ज़ि‍रह की लड़ाईमें खुद को खोजने निकलूंगा, कभीनिकला करते थे जैसे कॉर्टोग्राफ़रमापने पहाड़, पानी की चौड़ाईचार दिन और तीन रातों के सफ़रके बाद दीखेगा कोई सूखा मैदाननिर्जन अनजान, झमेले दारु के अड्डेपर कई सारे सिर... [पूरी पोस्ट]
writer Pramod Singh

मन की गांठ

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[26 May 2010 18:17 PM]

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