तन्हाई
ए कलम काश मेरा भी कोई तेरे कागज़ की तरह हमदम होता,मेरे दिल से उमड़ती स्याही कोमैं किसी से तो बाँट पता.ए आंसू काश मेरा भी कोई तेरेगाल की तरह हमराज़ होता,मेरे बिखरते मोतिओं को यहाँ कोई तो समझ पता.ए धरती काश मेरा भी कोई तेरेआसमां की तरह हमजाद होता,मेरी आग...
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●๋• नीर ஐ
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[26 May 2010 13:38 PM]



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