सोचो ऐसा क्यों होता है और मुझे भी बताओ

अपना पंचू  कई रोज मैं सोचता रहता हूं और सोचते-सोचते बहुत दूर तक निकल जाता हूं। लेकिन, इतनी दूर जाने के बाद भी वह जवाब नहीं मिलता जिसके लिए मैं सोचते-सोचते इतनी दूर निकल आया था। खैर अबकी सोच रहा हूं क्यों न बहुत दूर तक जाने की अपेक्षा अपने साथियों से सहारा ले... [पूरी पोस्ट]
writer lokendra singh rajput

अखबार जगत

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[26 May 2010 13:47 PM]

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