उर्मिल पूछ रही लछमन से.......
तन का क्या विश्वास रे जोगीतन तो मन का दास रे जोगीभगवे में भगवान बसे हैंजटा-जूट विन्यास रे जोगीउर्मिल पूछ रही लछमन सेकौन दोष मम् खास रे जोगीजाम-सुराही छूट गये सबछूट गया अभ्यास रे जोगीसूरज, चंदा, जुगनू, तारेकिस को, किस की आस रे जोगीतितली, भंवरे, कोयल,...
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योगेन्द्र मौदगिल
ग़ज़ल
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[26 May 2010 12:36 PM]



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