अवकाश

prayaas सबसे मिलकर एक बार फिर से जाना है/अपनी जिज्ञासा का उदगम मुझमे, समाधान भी मुझमे, और मुझमे ही ठिकाना है/जीवन की राह पर ऐडा टेढ़ा चलना रोमांच बढ़ाता  है/पर कोल्हू का बैल आगे कब बढ़ता है? बस चलता जाता है/पाँव... [पूरी पोस्ट]
writer pawan dhiman
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[26 May 2010 10:27 AM]

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