सर्द मुस्कान

गीत............... एक   साझा  नज़्म....कभी कभी कुछ रचनाएँ मुक्कमल होती हैं जुगलबंदी से.....आज की  यह नज़्म भी एक ऐसी ही जुगलबंदी है...मैंने नज़्म ड्राफ्ट की ही थी कि शिखा (वार्ष्णेय ) Online दिखाई  दे गयी...बस मैंने यह नज़्म उसको भेज... [पूरी पोस्ट]
writer sangeeta swarup

कविता ( सर्वाधिकार सुरक्षित )

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[26 May 2010 08:35 AM]

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