कवियों ! अब तुम कविताओं में सिर्फ़ देश की बात करो
बहुत हो चुकी नारी की छीछालेदार इन मंचों परबहुत हो चुका घरवाली का कारोबार इन मंचों परबहुत हो चुके सड़े चुटकुले बार-बार इन मंचों परबहुत हो चुके टुच्चे टोटके लगातार इन मंचों परबहुत हो चुकी गीत ग़ज़ल छंदों की हार इन मंचों परबहुत हो चुका चीर काव्य का तार तार...
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[26 May 2010 08:35 AM]



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