अंतिम क़िस्त से पहले दो तरही ग़ज़लें और
कल शाम तक अंतिम क़िस्त शाया हो जायेगी लेकिन अंतिम क़िस्त से पहले ये दो ग़ज़लें और मुलाहिज़ा कीजिए-पूर्णिमा वर्मनसब कुछ तेरे पास रे जोगीकाहे आज उदास रे जोगीमुशकिल रहना देस बेगानेअपना पर अभ्यास रे जोगीखाना, पानी, गीत बेगानेअपनी मगर मिठास रे जोगीदूर नगर में...
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सतपाल ख़याल
कौन चला बनवास रे जोगी
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[26 May 2010 07:54 AM]



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