कौन खोंट लेता है मन पर उगी हरी दूब (मनोज झा की 4 कविताएँ)

हिन्द-युग्म मनोज कुमार झा एक बेहद अलग वाक्य-विन्यास की कविताएँ लिखते हैं। इनकी कुछ कविताओं से हमने आपके पिछले सप्ताह परिचय करवाया था। आज हम इनकी कुछ और कविताओं को प्रकाशित कर रहे हैं-इस तरफ से जीनायहाँ तो मात्र प्‍यास-प्‍यास पानी, भूख-भूख अन्‍नऔर साँस-साँस भविष्‍यवह... [पूरी पोस्ट]
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manoj kumar jha

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[26 May 2010 05:58 AM]

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