सार्थक..
सार्थक........जीवन ,बातें,परिश्रम या रचना,किसी के साथ जुड़ कर उसके साथ एक अनुभूति को जोड़ता है|वो अनुभूति है संतुष्टी|जब कोई भी बात या कार्य ,कोई अर्थ लिए हुए होता है,तो उसके सफल या असफल होने से ज्यादा उसका होना संतोष से भर देता है|जब बात सार्थक अस्तित्व...
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आस्था "देव"
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[26 May 2010 04:38 AM]



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