खुद से ही दूर
नहीं जाना है उस गलीजो कर दे मुझे खुद से ही दूरपानी से पतला जीवन हैफिसला जाता है अपना ही नूरअग्नि से तेज क्रोध हैजल जाता है तन मन वजूदहवा से तेज मन है चलतानहीं संभलता है गति का अवरोधआकाश से खाली हैं गर विचार भारी नहीं है मन उदारधरती सा धैर्य है अगरफलें...
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शारदा अरोरा
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[26 May 2010 02:08 AM]



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