अस्पताल बीमार

मनोरमा पैरों की तकलीफ से वो चलती बेहाल।किसी ने पीछे से कहा क्या मतवाली चाल।।बी०पी०एल० की बात कम आई०पी०एल० का शोर।रोटी को पैसा नहीं रन से पैसा जोड़।।दवा नहीं कोई मिले डाक्टर हुए फरार।अब बीमार जाए कहाँ अस्पताल बीमार।।भूल गया मैं भूल से बहुत बड़ी है भूल।जो विवेक... [पूरी पोस्ट]
writer श्यामल सुमन

कविता

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[26 May 2010 00:50 AM]

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