वहां मेले में - कविता - कुमार मुकुल

कारवाँ वहां मेले में रोशनी थी बहुत पर इससे मेंले के बाहर का अंधेरा और गहराता सा डरा रहा था एक जगह लाउडस्‍पीकर चीख रहा था ...लडकी लडकी लडकी बस अभी कुछ ही देर में जादूगर इस लडकी को नाग में बदल देगा लडकी लडकी लडकी... वहां मंच पर दो लडकियां चाइनों की तरह मुस्‍कुरा... [पूरी पोस्ट]
writer
views
9
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
0
[26 May 2010 00:48 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix